हरिद्वार

भारतीय सेना दिवसः सभी भारतीयों के लिए सम्मान एवं गौरव का दिन

कुलदीप राय उत्तराखंड प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(कुलदीप राय) हरिद्वार। देश की सुरक्षा आज सबसे अहम तथा एक बडी चुनौती बनकर सामने आ रही है। दुनिया जहां पर्यावरण के बढते असन्तुलन से चिंतित है, वही आतंकवाद जैसी विश्वव्यापी समस्या के कारण पडोसी देशों से आपसी सम्बंध को बेहतर बनाने की दिशा मे प्रयास जारी है। हरिद्वार के मनोवैज्ञानिक डॉ० शिवकुमार चौहान का कहना है कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो आतंकवाद रूपी शैतान के छदम युद्व से रोज लड रहा है। यह आतंकवाद अब तक असंख्य लोगो को अपना ग्रास बना चुका है। इससे देश में जान-माल दोनो की हानि हो रही है। न जाने कितने सैनिक आतंकवाद का मुकाबला करके शहीद हो चुके है। मातृ भूमि पर ऐसे वीर जवानो के बलिदान, शौर्य, त्याग एवं संघर्ष को सभी देशवासी श्रद्वा पूर्वक नमन करते है। आज हमारी सेना आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए आधुनिक शस्त्रों का उपयोग करते हुये दुश्मन को मुंहतोड जवाब दे रही है। जिससे आज भारतीय सेना वर्तमान, भूत तथा भविष्य के गौरवशाली अतिहास की सृजनकर्ता बन चुकी है। ऐसी वीर सैनिको से ही भारतीय सेना दुनिया की चौथी सबसे बडी शक्ति बन गई है। देश की आजादी से पहले सेना पर ब्रिटिश कमांडर का कब्जा था। साल 1947 में देश के आजाद होने के बाद भी भारतीय सेना का अध्यक्ष ब्रिटिश मूल का ही होता था। साल 1949 में आजाद भारत के आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर थे। जिनकी जगह ली भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा ने। वह आजाद भारत के पहले भारतीय सैन्य अधिकारी थे और भारत.पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में उन्होंने ही भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। बाद में करियप्पा फील्ड मार्शल भी बने। दरअसल फील्ड मार्शल केएम करियप्पा आजाद भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख 15 जनवरी 1949 को बने थे। ये भारत के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। इसलिए 15 जनवरी को हर साल भारतीय सेना दिवस के तौर पर मनाया जाता है। जब करियप्पा सेना प्रमुख बने तो उस समय भारतीय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे। करियप्पा साल 1953 में रिटायर हो गए थे और 94 साल की उम्र में साल 1993 में उनका निधन हुआ था।

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