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महंत संतोख सिंह महाराज उच्च कोटि के संत थे: महंत जगजीत सिंह शास्त्री

ऋषभ चौहान हरिद्वार सवांददाता

महंत संतोख सिंह की अस्थियां कनखल सती घाट में गंगा में विसर्जित की गई
(ऋषभ चौहान) हरिद्वार। पंजाब के दयालपुर के निर्मल भैख के जाने-माने प्रमुख संत महंत संतोख सिंह महाराज के अस्थि अवशेष सती घाट कनखल में गंगा में वैदिक विधि विधान के साथ विसर्जित किए गए। उनके उत्तराधिकारी शिष्य महंत अमरिंदर सिंह महाराज ने अपने गुरु की अस्थियां गंगा में विसर्जित की। इससे पूर्व सती घाट कनखल में पीजी पातशाही गुरु अमरदास गुरुद्वारा में महंत संतोख सिंह महाराज की स्मृति में गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष अरदास की गई। इस अवसर पर निर्मल संत पुरा के मुकामी महंत एवं अध्यक्ष महंत जगजीत सिंह महाराज ने कहा कि महंत संतोख सिंह महाराज महाराज एक दिव्य और उच्च कोटि के संत थे, युवावस्था में उन्होंने धर्म के प्रचार के लिए बहुत अधिक कार्य किया। महंत रेशम सिंह महाराज ने कहा कि महंत संतोख सिंह महाराज के विचार हर युग में प्रासंगिक रहेंगे, उनके धर्म क्षेत्र में किए गए कार्य को भुलाया नहीं जा सकता है महंत संतोख सिंह महाराज के उत्तराधिकारी महंत अमरिंदर सिंह महाराज ने कहा कि वे अपने गुरु के बताए पद चिन्हों पर चलेंगे और उनके द्वारा छोड़े गए अधूरे कार्यों को पूर्ण करेंगे। इस अवसर पर महंत अनूप सिंह, महंत जगरूप सिंह, महंत गुरसेवक सिंह, महंत जगराज सिंह, महंत जगतार सिंह, महंत प्रेम सिंह, महंत चमकौर गिरी भाई रूपा, युवा भारत साधु समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवानंद महाराज, डॉक्टर स्वामी हरिहरानंद शास्त्री,स्वामी रवि देव, महंत केशवानंद, महंत दिनेश दास, स्वामी आनंद शास्त्री, महंत कृष्णागिरी, महंत सुरेश दास, महंत प्रेमदास, महंत रविंद्रनंद, महंत बसंत मुनि, ग्रंथि देवेंद्र सिंह, इंदरजीत सिंह, लवप्रीत सिंह, गुरचरण सिंह, कुलवंत सिंह आदि ने श्रद्धांजलि दी इस अवसर पर निर्मल संत पुरा आश्रम में महंत संतोख सिंह महाराज की याद में लंगर का आयोजन किया गया।

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